Author :- Nitu Singh Nishad

Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon: धरती फोड़ गणेश मंदिर की अद्वितीय कथा

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Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon छत्तीसगढ़ राज्य के धमतरी जिले के बेलारगांव तहसील के गढ्डोंगरी (माल ) गांव में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सिहावा क्षेत्र में स्थित है और धरती फोड़ गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान गणेश की मूर्ति स्वयंभू है और मूर्ति का अधिकांश भाग अभी भी जमीन के नीचे गड़ा हुआ है। इस अद्भुत मंदिर का इतिहास बहुत ही दिलचस्प और रोचक है। चलिए जानते हैं इनके हर एक पहलू को…..
Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon का पूर्ण इतिहास

मंदिर निर्माण के संबंध में जनश्रुति
Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon का इतिहास लगभग 1955-1960 से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर के निर्माण की एक कहानी है , यहां मंदिर के स्थान पर एक किसान का खेत था हर वर्ष जब किसान खेत को जुताई करता था, तो एक विशेष स्थान पर उसका नागर फंस जाता या फिर टूट जाता था।
शुरू में इस घटना को किसान ने नजरअंदाज किया और इसे एक सामान्य पत्थर समझा। लेकिन जब यह घटना बार-बार घटने लगी, तो किसान ने इसे गंभीरता से लिया सोच में पड़ गया।उसी रात उसे स्वप्न में दर्शन हुआ कि जिस स्थान पर उसका नागर टूटता है, वह सामान्य पत्थर नहीं अपितु भगवान गणेश जी की मूर्ति है।

इस घटना के बाद, किसान ने गढ़ डोंगरी के मालगुजार को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद यहां खुदाई की गई और गणेश भगवान की छोटी सी मूर्ति प्राप्त हुई। जो जमीन पर धंसी हुई थी, । और समय के साथ धीरे धीरे बढ़ने लगी, प्रत्यक्ष दर्शी बुजुर्ग बताते हैं के जब उन्होंने पहली बार मूर्ति देखी थी तो छोटी सी थी, परंतु समय के साथ साथ मूर्ति बढ़ने लगी। सर्वप्रथम भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना एक झोपड़ी में की गई थी, लेकिन जैसे-जैसे लोग यहां दर्शन करने आने लगे,लोगों ने दान दिए यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया। आज यह मंदिर पूरे सिहावा क्षेत्र में प्रसिद्ध है।
डिस्क्लेमर – हमारे द्वारा लिखी गई इस मंदिर के निर्माण की कहानी सिर्फ एक जन श्रुति एवं बड़े बुजुर्गों के कथन से संबधित है हम इसके प्रमाणिकता का दावा नहीं करते
स्वयंभू गणेश मूर्ति: Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon की विशेषता

Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक स्वयंभू गणेश मंदिर है। यहां की मूर्ति का अधिकांश भाग आज भी जमीन के भीतर गड़ा हुआ है। यह विशेषता इस मंदिर को अनोखा बनाती है। यहां आने वाले श्रद्धालु यह मानते हैं कि यहां पूजा करने से उनके सभी दुख और परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं। यह मंदिर न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी मनोकामना पूर्ति करने वाली शक्ति के लिए भी जाना जाता है।
Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon का प्राकृतिक सौंदर्य
Ganesh Mandir Gadhdongari से सम्बंधित हमारा यूट्यूब वीडियो यहाँ देखें–https://youtube.com/shorts/pJZ80-5ZnBc?si=zm-rVbq2D3BakURm
Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon का वातावरण बहुत ही शांति और सौंदर्य से भरपूर है। मंदिर के चारों ओर हरियाली और पहाड़ी इलाकों का दृश्य आपको मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां का शांतिपूर्ण माहौल और प्राकृतिक दृश्य आपका मन और आत्मा दोनों को शांति प्रदान करते हैं। आप यहां दर्शन करने के बाद मानसिक शांति और संतुष्टि का अनुभव करते हैं।

मंदिर के आसपास के क्षेत्र में लहराते हुए खेत, घने जंगल और हरे-भरे पहाड़ों का दृश्य आपको बहुत आकर्षित करता है। यह जगह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आदर्श स्थल है।
Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon से सम्बंधित पारंपरिक धार्मिक कथा और घटनाएँ

Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को यहां की कुछ अद्भुत घटनाओं का भी अनुभव होता है। बचपन में, मै स्वयं जब इस मंदिर में दर्शन करने जाता था, तो वहां भालू और बंदरों का आना एक सामान्य बात हो गई थी। मंदिर की घंटी बजते ही बंदरों का पूरा झुंड मंदिर के पास के पेड़ों आकर बैठ जाते थे, प्रसाद मिलने का इंतजार करते थे। जब तक उन्हें प्रसाद नहीं मिलता था, वे पेड़ों पर या नीचे जमीन पर बैठे रहते थे।

यहां तक कि शिव लिंग के सम्मुख पेड़ के खोल में सांप का निवास आम बात थी, जो बाहर भी आता था और वापस अपने खोल में घुस जाता था, यह घटना मेरे स्वयं के अनुभव हैं, यह दृश्य उस समय बहुत आम था जो भी मंदिर दर्शन करने जाता उसे यह अनुभव हो ही जाता था, लेकिन आजकल यह केवल यादे बनकर रह गई है।

Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon में दर्शन के लाभ

- मनोकामना पूर्ति: Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon को एक मनोकामना पूर्ति करने वाला स्थान माना जाता है। यहां आने से श्रद्धालुओं की इच्छाएँ पूरी होती हैं, तकलीफ दूर होती है और वे मानसिक शांति प्राप्त करते हैं।
- स्वयंभू गणेश: इस मंदिर में स्थित गणेश भगवान की मूर्ति स्वयंभू है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग और विशेष बनाती है।
- धार्मिक शांति: यहां के शांतिपूर्ण वातावरण में मानसिक शांति और आत्मिक संतुष्टि मिलती है। यहां कुछ समय व्यतीत करने से आपके मन की उलझनें समाप्त हो जाती हैं।
- प्राकृतिक सौंदर्य: इस मंदिर के आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य आपको मंत्रमुग्ध कर देता है और यह स्थल एक आदर्श धार्मिक पर्यटन स्थल बन जाता है।
तो अगर आप इस गणेश चतुर्थी किसी स्वयंभू गणेश मंदिर जिसकी निर्माण ,प्रसिद्धि, लोकप्रियता और विशेषता 60 से 70 साल पुरानी हो, जिसकी चर्चा पुरे सिहावा क्षेत्र में हो उस विघ्नहर्ता स्वयंभू गणेश जी का दर्शन करना चाहते हैं ,और एक ऐसा मंदिर ढूंढ रहे हैं जो प्रकृति के करीब हो, घने पेड़ पौधे, आसपास नदी पहाड़ और सुन्दर स्वच्छ वातावरण हो, तो गढ़डोंगरी बेलरगांव आपके लिए एक Perfect Place हो सकता है आसपास सिहावा की वादियाँ , सोंढूर जलाशय की सुंदरता, और उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व की रोचकता का अनुभव करना चाहते हैं तो चले आइये Swayambhu Ganesh Mandir Gadhdongari (Mal), Tah- Belargaon,Dist- Dhamtari, Chhattisgarh-493770
कैसे पहुँचें स्वयंभू गणेश मंदिर ?How To Reach Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon?

Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon धमतरी जिले के गढ़डोंगरी स्थित है। यहां पहुँचने के लिए आपको पहले धमतरी शहर तक पहुँचना होगा और फिर वहाँ से स्थानीय वाहन या निजी वाहन द्वारा गढ़ डोंगरी तक पहुँच सकते हैं। रास्ते में आपको प्राकृतिक दृश्य और हरियाली का भरपूर आनंद मिलेगा, जो इस यात्रा को और भी खास बनाता है।
धमतरी→ केरेगांव→ नगरी →सिहावा→ गढ्डोंगरी (80 KM)
या फिर
धमतरी→ केरेगांव→ गट्टासिल्ली→बीरगुड़ी→ भूमका→ बेलरगांव→ गढ्डोंगरी (65 KM)
गणेश जी की पूजा का महत्व
गणेश जी की पूजा का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। प्रत्येक शुभ कार्य की शुरुआत में गणेश जी की पूजा की जाती है ताकि सभी विघ्नों को समाप्त किया जा सके और सफलता सुनिश्चित हो सके। विशेष रूप से विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा की जाती है, जो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा की जाती है और भक्त उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु विभिन्न प्रकार की पूजा विधियों का पालन करते हैं। गणेश पूजा का उद्देश्य न केवल समृद्धि प्राप्त करना है, बल्कि जीवन में आने वाली सभी समस्याओं और विघ्नों को दूर करना भी है। गणेश पूजा के दौरान श्रद्धालु लड्डू और नारियल जैसे प्रसाद अर्पित करते हैं, जो भगवान गणेश को प्रिय माने जाते हैं।
निष्कर्ष
Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर भी है। इसकी स्वयंभू गणेश मूर्ति, प्राकृतिक सौंदर्य, और मनोकामना पूर्ति करने वाली शक्ति इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटकों और आत्मिक शांति की तलाश करने वाले लोगों के लिए भी आदर्श है। यदि आप गणेश जी के भक्त हैं और छत्तीसगढ़ के किसी अद्भुत धार्मिक स्थल की तलाश में हैं, तो Ganesh Mandir Gadhdongari Belargaon निश्चित रूप से आपके यात्रा स्थल की सूची में होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में प्रमुख गणेश मंदिरों की जानकारी–
1. भूमि फोड़ गणेश मंदिर, बालोद

बालोद जिले के मरार में स्थित यह मंदिर अपनी चमत्कारी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। यह गणेश प्रतिमा भूमि से प्रकट हुई मानी जाती है और भक्तों का मानना है कि यह मूर्ति समय के साथ बढ़ती जा रही है। यह मंदिर संतान प्राप्ति की मनोकामना रखने वाले भक्तों के बीच खासा लोकप्रिय है। मंदिर में पूजा करने से जीवन में समृद्धि और समस्याओं का समाधान होता है।
2. ढोलकल गणेश मंदिर, दंतेवाड़ा

यह मंदिर बैलाडिला पहाड़ी पर स्थित है, जो 3000 फीट ऊंचाई पर है। ढोलकल गणेश की काले ग्रेनाइट से बनी मूर्ति लगभग 3 फीट ऊंची है। माना जाता है कि इसे छिंदक नागवंशी राजाओं ने 11वीं शताब्दी में स्थापित किया था। हालांकि, जनवरी 2017 में नक्सलियों द्वारा इस मूर्ति को गिरा दिया गया था, लेकिन फिर से उसे पुनः स्थापित किया गया। यह मंदिर कठिन रास्तों और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है।
3. मोती डुंगरी गणेश मंदिर, रायपुर

रायपुर शहर में स्थित यह मोती डुंगरी गणेश मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। यह मंदिर अपनी पुरानी गणेश प्रतिमा के लिए जाना जाता है, जो स्थानीय लोगों के लिए अत्यधिक पूजनीय है। यहां विशेष रूप से बुधवार को भक्तों का हुजूम उमड़ता है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से दुर्घटनाओं से बचाव होता है और जीवन में शुभता आती है।
4. जुड़वा गणेश मंदिर, बारसूर, दंतेवाड़ा

बारसूर गांव जिसे “देवनगरी” के नाम से जाना जाता है, यहां भगवान गणेश की दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति स्थित है। इसे “जुड़वा गणेश” के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि यहां पूजा करने से सभी प्रकार की चिंताएं और दुख समाप्त हो जाते हैं।
5. दगडूसेठ हलवाई गणपति मंदिर, रायगढ़

रायगढ़ में स्थित दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है। यहां की गणेश मूर्ति में विशेष प्रकार की आध्यात्मिक शक्ति मानी जाती है, जो भक्तों के जीवन को बदल देती है। यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना के लिए आकर बहुत प्रसिद्ध हो गया है। यहां का माहौल भक्तों को एक प्रकार की मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करता है।
सिहावा क्षेत्र में ही स्थित स्वयम्भू शीतला मंदिर के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए हमारा यह ब्लॉग अवश्य पढ़ें आपको पसंद आएगा – https://suchnamitra.com/sitla-mandir-sihawa-cg-history-detail-travel-guide/