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कौही स्वयंभू शिवलिंग: स्वयं‑भू शिवमंदिर, महाशिवरात्रि मेले का विस्तृत इतिहास

Posted on July 27, 2025August 3, 2025 By NITU SINGH NISHAD No Comments on कौही स्वयंभू शिवलिंग: स्वयं‑भू शिवमंदिर, महाशिवरात्रि मेले का विस्तृत इतिहास

कौही शिव मंदिर: स्वयंभू शिवलिंग, महाशिवरात्रि मेला और खारून नदी व्यू पॉइंट की रहस्यमयी यात्रा

Table of Contents

  • कौही शिव मंदिर: स्वयंभू शिवलिंग, महाशिवरात्रि मेला और खारून नदी व्यू पॉइंट की रहस्यमयी यात्रा
    • कौही स्वयंभू शिवलिंग: स्वयं‑भू शिवमंदिर
    • कौही स्वयंभू शिवलिंग: स्वयं‑भू शिवमंदिर, महाशिवरात्रि मेले का विस्तृत इतिहास
कौही शिव मंदिर

कौही स्वयंभू शिवलिंग: स्वयं‑भू शिवमंदिर

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धमतरी व दुर्ग जिले की विभाजक सीमा खारून नदी के तट पर स्थित ग्राम कौही में स्थित यह शिव मंदिर धार्मिक एकता का प्रतीक है। यहां विराजमान स्वयं‑भू शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसका लगातार बढ़ता आकार है, जिसकी ऊंचाई अब लगभग छह फीट हो चुकी है, पर खुदाई के बावजूद आखिरी छोर अभी तक नहीं मिला है ।

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ग्रामीण मान्यता अनुसार यह शिवलिंग खुदाई के दौरान प्रकट हुआ था, और मंदिर निर्माण की शुरुआत से पहले लगभग 20–25 फीट खुदाई की गई, लेकिन शिवलिंग का दूसरा सिरा नहीं मिला । इसके प्रकट होने के बाद स्थानीय स्वामी मोहनानंद को स्वप्न में महादेव दर्शन हुआ, जिसके आदेश से आनंदमठ परिसर में मंदिर निर्माण शुरू हुआ।

कौही स्वयंभू शिवलिंग: स्वयं‑भू शिवमंदिर, महाशिवरात्रि मेले का विस्तृत इतिहास

ऊंचाई अब लगभग 6 फीट।

परिधि लगभग 5 मीटर तक  ।

खुदाई में शिवलिंग का रहस्य अब तक अज्ञात—यह अंतिम छोर शायद कहीं और गहराई में निहित है।

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सावन महीने के अंतिम सोमवार पर यहाँ विशाल बोलबम कांवड़िया मेला, रुद्राभिषेक, महाभंडारी भंडारा आयोजित होता है ।

महाशिवरात्रि के तीन दिनों तक भी मेला लगता है, जिसमें हवाई झूला, झांझर नृत्य आदि सांस्कृतिक आयोजन होते हैं ।

इस आयोजन में आसपास के कई ग्राम (सिलतरा, सुपेला, सेमर, रानीतराई आदि) की समितियां मिलकर सेवा करती हैं ।

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श्रद्धालुओं की मान्यता है कि 100 वर्ष पूर्व स्वामी मोहनानंद की साधना से माँ काली खारून नदी के जलमार्ग से कोलकाता से आई और यहां स्थायी हुईं। इस कारण यहां महाकाली व महादेव की एक साथ पूजा कि जाती है ।

आयोजन की रूपरेखा

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दिनांक: प्रतिवर्ष सावन का अंतिम सोमवार (उदाहरण: 4 अगस्त 2025)

समारोह प्रारंभ: सुबह 8 बजे रुद्राभिषेक शिवलिंग का जलाभिषेक, उसके बाद हवन‑पूजन, महाभंडारी भोग वितरण आदि।

सांस्कृतिक: रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे झांझर नृत्य, लोकगीत प्रस्तुति आदि आयोजन में शामिल।

सेवाकार्य: मंत्रोच्चार, सामूहिक मानव श्रृंखला, स्वास्थ्य‑प्रशासन सहयोग, ध्वनि‑प्रसारण आदि का समन्वय समिति द्वारा किया जाता है ।

मंदिर परिसर का स्वरूप

कौही में निर्मित नवदुर्गा मंदिर

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आनंदमठ परिसर लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें शिव मंदिर एवं 21 देवी‑देवताओं के मंदिर सम्मिलित हैं

आसपास की ग्राम समितियों द्वारा परिसर की सफाई‑राहदारी सुनिश्चित की जाती है।

🧿 मान्यताएँ और स्थानीय कथा

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स्वप्न में दर्शन देकर स्वामी मोहनानंद को मंदिर निर्माण का आदेश; स्वयं‑भू लिंग प्रकट हुआ; उस स्थान पर मंदिर बनवाया गया।

जनश्रुति है कि शिवजी की आराधना से मनोकामना पूर्ण होती है, इसलिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहां आती है।

माँ काली की पूजा की कथा से मंदिर परिसर में शक्ति व शिव दोनों की एक साथ उपासना का माहौल रहता है।

ग्राम कौही का यह अद्भुत शिव मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भौतिक रहस्य, अद्भुत स्वयं‑भू मूर्ति, और समुदाय आधारित लोक‑संस्कृति का जीवंत मिश्रण प्रस्तुत करता है। अगर आप धार्मिक स्थलों, रहस्यमयी आत्मिक स्थापत्य, और सांस्कृतिक मेलों की खोज में हैं, तो यह स्थान अनूठा अनुभव देगा।

धमतरी जिले से कौही स्थित स्वयंभू शिव मंदिर की यात्रा जितनी धार्मिक है, उतनी ही प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण भी है। इस मंदिर तक पहुँचने के दो प्रमुख मार्ग हैं:

धमतरी → भखारा → पचपेड़ी → सिलघट → कौही
यह मार्ग उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष है जो सिलघट के खारून नदी व्यू प्वाइंट का अद्भुत दृश्य देखना चाहते हैं। सिलघट खारून नदी के ठीक किनारे स्थित है। यहाँ से जैसे ही आप नदी पार करते हैं, कौही गांव आरंभ हो जाता है। खासकर सावन के दिनों में, जब खारून नदी पूरे उफान पर होती है, नदी का दृश्य मनमोहक और शांतिदायक होता है। घाट पर बैठकर बहते जल को देखना स्वयं एक आध्यात्मिक अनुभव है।

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धमतरी → भखारा → सेमरा → कौही
यह मार्ग अपेक्षाकृत सरल और सीधा है। ग्रामीण सौंदर्य और खेत-खलिहानों से होते हुए जब आप कौही पहुंचते हैं, तो गांव की शांति और आध्यात्मिक वातावरण मन को छू जाता है।

यात्रा का उत्तम समय

कौही की यात्रा का सर्वोत्तम समय है सावन का महीना या फिर महाशिवरात्रि का पर्व।

सावन में खारून नदी का नज़ारा देखने लायक होता है। चारों ओर हरियाली, उफनती नदी और शिवभक्तों की टोलियां—यह सब मिलकर एक दिव्य अनुभव देते हैं।

महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय मेला लगता है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। इस समय गांव एक जीवंत उत्सवधर्मी नगरी में बदल जाता है।प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग

शिव भक्त हमारा यह ब्लॉग अवश्य पढ़ें, भूतेश्वर महादेव के बारे में लिखा गया यह ब्लॉग👉https://suchnamitra.com/bhuteshwar-mahadev-temple-chhattisgarh-largest-natural-shivling/

CG Tourism Tags:कौही शिव मंदिर, खारून नदी व्यू पॉइंट, स्वयंभू शिवलिंग कौही

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